Agra’s streets carry a silent echo—a legacy of humility, compassion, and service that refuses to fade. That legacy belongs to Lala Banke Lal Maheshwari, the man who founded Shri Nath Ji Free Water Service. Though he has passed away, his spirit lives on in every drop of cool water that quenches a passerby’s thirst in the city’s scorching heat.

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स्वर्गीय लाला बांके लाल माहेश्वरी, श्री नाथ जी निःशुल्क जल सेवा के संस्थापक, भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी सादगी, सेवा, और विनम्रता की गूंज आगरा की गलियों में हमेशा जीवित रहेगी। जहां आज समाज सेवा में अहंकार और दिखावा आम हो गया है, वहीं बांके लाल जी सौम्यता और उदारता के जीवंत प्रतीक थे। उनकी प्रेरणा हमें जोश और समर्पण से भर देती है...

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हिंदुस्तान की पौराणिक कथाओं में दर्ज ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या, पांडवों की पत्नी द्रौपदी, वानर राज बाली की पत्नी तारा, पांडु की पत्नी कुंती और रावण की पत्नी मंदोदरी के प्रेरक जीवन चरित्र पर केंद्रित उपन्यास 'गाथा पंचकन्या' को देशभर के साहित्यकारों के मध्य विशेष चर्चा और सराहना मिल रही है।

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आगरा, जो विश्व प्रसिद्ध ताज महल के लिए जाना जाता है, केवल इस स्मारक तक सीमित नहीं है। यहां बहने वाली यमुना नदी भी शहर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह नदी न केवल आगरा के जीवन का आधार रही है, बल्कि इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को भी समृद्ध करती है...

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पं. रघुनाथ तलेगांवकर फाउंडेशन ट्रस्ट एवं संगीत कला केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नाद साधना प्रातःकालीन सभा के 33वें वार्षिक समारोह में पं. केशव द्वारा रचित चार ताल में ध्रुपद शैली पर आधारित राग अहीर भैरव में नाद वंदना प्रस्तुत की गई।

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There is a clear difference between the political shifts witnessed in West Bengal and Tamil Nadu. In Bengal, Hindutva became the engine of political change. In Tamil Nadu, however, the winds carried…

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A single punch in a school corridor can shatter a childhood in seconds. We like to think of schools as sanctuaries; places where discipline and dreams are nurtured. But on April 25, at Delhi Public…

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कभी घर सिर्फ ईंट और छत नहीं होते थे, यादों के गोदाम होते थे। उन यादों की रखवाली करते थे, कई भारी-भरकम ट्रंक और खनखनाते कनस्तर...

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आगरा, मथुरा और हाथरस का यह पवित्र त्रिकोण कृष्ण प्रेम की मीठी धुन पर थिरकता है। यमुना की लहरों और ब्रज की धूल में दूध, घी और खोए की महक आज भी घुली हुई है...

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