मेरे जीवन का एक विश्वस्त साथी रहा है—मेरा झोला। यह कोई साधारण थैला नहीं, बल्कि मेरे व्यक्तित्व, मेरे विचारों और मेरी आदतों का प्रतीक है। पचास वर्षों से यह मेरे साथ रहा है। कभी किताबों से भरा, कभी कागज़ातों से, तो कभी सपनों से।

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Agra’s streets carry a silent echo—a legacy of humility, compassion, and service that refuses to fade. That legacy belongs to Lala Banke Lal Maheshwari, the man who founded Shri Nath Ji Free Water Service. Though he has passed away, his spirit lives on in every drop of cool water that quenches a passerby’s thirst in the city’s scorching heat.

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स्वर्गीय लाला बांके लाल माहेश्वरी, श्री नाथ जी निःशुल्क जल सेवा के संस्थापक, भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी सादगी, सेवा, और विनम्रता की गूंज आगरा की गलियों में हमेशा जीवित रहेगी। जहां आज समाज सेवा में अहंकार और दिखावा आम हो गया है, वहीं बांके लाल जी सौम्यता और उदारता के जीवंत प्रतीक थे। उनकी प्रेरणा हमें जोश और समर्पण से भर देती है...

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हिंदुस्तान की पौराणिक कथाओं में दर्ज ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या, पांडवों की पत्नी द्रौपदी, वानर राज बाली की पत्नी तारा, पांडु की पत्नी कुंती और रावण की पत्नी मंदोदरी के प्रेरक जीवन चरित्र पर केंद्रित उपन्यास 'गाथा पंचकन्या' को देशभर के साहित्यकारों के मध्य विशेष चर्चा और सराहना मिल रही है।

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आगरा, जो विश्व प्रसिद्ध ताज महल के लिए जाना जाता है, केवल इस स्मारक तक सीमित नहीं है। यहां बहने वाली यमुना नदी भी शहर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह नदी न केवल आगरा के जीवन का आधार रही है, बल्कि इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को भी समृद्ध करती है...

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When did we stop fixing things? When did a loose wire become a death sentence? When did a cracked screen mean goodbye, not repair?

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Every year, the same dream grows in millions of Indian homes: a son or daughter becomes a doctor. Every year, that dream must pass through a difficult exam. And every year, the mountain of hopes collides…

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एक तरफ़ देश में एक्सप्रेसवे, मेट्रो, एयरपोर्ट और डिजिटल क्रांति की नई इबारत लिखी जा रही है। दूसरी तरफ़ समाज का एक बड़ा हिस्सा अब भी सदियों पुराने पूर्वाग्रहों और सामंती सोच की जंजीरों में जकड़ा हुआ…

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आगरा, मथुरा और हाथरस का यह पवित्र त्रिकोण कृष्ण प्रेम की मीठी धुन पर थिरकता है। यमुना की लहरों और ब्रज की धूल में दूध, घी और खोए की महक आज भी घुली हुई है...

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