आपातकाल के कठिन दौर में जब जला व्यापारी एकता का दीप...



आगरा : जब वर्ष 1975 में देश में आपातकाल लागू हुआ तब व्यापारियों पर सरकारी नियमों का दबाव था और कपड़ा व्यापारियों के सामने सम्मान एवं अस्तित्व की चुनौती खड़ी थी।

कपड़ा व्यापारियों को हर वर्ष व्यापार लाइसेंस का नवीनीकरण कराना पड़ता था और उस समय लाइसेंस नवीनीकरण को नसबंदी से जोड़ दिया गया था। व्यापारियों ने इस व्यवस्था को अपने सम्मान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के विरुद्ध माना।

इधर, आगरा की तत्कालीन थोक कपड़ा कमेटी में सभी समाज और वर्ग के व्यापारियों को समान प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा था। ऐसी परिस्थितियों में एक ऐसे संगठन की आवश्यकता महसूस की गई, जो जाति, समाज और वर्ग से ऊपर उठकर प्रत्येक व्यापारी की आवाज बने। इसी संकल्प से आगरा क्लॉथ मर्केंटाइल एसोसिएशन की स्थापना हुई।

हाल ही में, आगरा क्लॉथ मर्केंटाइल एसोसिएशन, यानी एक्मा, के 50वें स्थापना दिवस एवं स्वर्ण जयंती समारोह में संस्था के एकमात्र जीवित संस्थापक सदस्य अशोक गोयल का विशेष सम्मान किया गया। वॉटर वर्क्स स्थित अग्रवन में आयोजित समारोह में उनके पांच दशकों के संघर्ष, समर्पण और व्यापारी हितों के लिए किए गए उल्लेखनीय योगदान को याद किया गया।

समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस पूरी पीढ़ी का सम्मान है, जिसने विपरीत परिस्थितियों में व्यापारियों को संगठित किया और उनके अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा के लिए एक मजबूत संगठन की नींव रखी।

अशोक गोयल, रामजी दास, घनश्याम दास, सन्तराम तथा उनके एक अन्य साथी ने मिलकर इस संगठन की स्थापना का निर्णय लिया था। संस्था के प्रथम अध्यक्ष चतरुमल तथा प्रथम महामंत्री सन्तोष कुमार जैन बने।

गोयल ने प्रारंभ से ही संगठन की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभाली। बैठकों की कार्यवाही स्वयं हाथ से लिखना, प्रत्येक निर्णय को सुरक्षित रखना तथा संगठन को व्यवस्थित स्वरूप देना उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

समारोह में संस्था के शुरुआती दौर के उन रजिस्टरों और दस्तावेजों को भी याद किया गया, जिनमें हाथ से लिखी गई बैठकों की कार्यवाही आज एक्मा के संघर्षपूर्ण इतिहास की जीवंत धरोहर है।




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