दिवाली का त्योहार आने वाला है। बाजारों में रौनक है, शहर में उत्सव की तैयारी है। लेकिन, यमुना की बदहाली पर सरकारी तंत्र की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है। आखिर जनप्रतिनिधियों को जगाने का इससे बेहतर तरीका क्या हो सकता है? झुनझुना बजाकर उन्हें उनकी जिम्मेदारियां याद दिलाई जाएं!
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