दिवंगत संतोष (सैम) नायर की आत्मकथा ‘सिल्वर लाइनिंग्स इन द डार्क स्काई’ का रविवार शाम होटल रॉयल इन में विमोचन हुआ। उनके मित्रों, प्रशंसकों, लेखकों, पूर्व सहयोगियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर पुस्तक का लोकार्पण किया।
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दिवंगत संतोष (सैम) नायर की आत्मकथा ‘सिल्वर लाइनिंग्स इन द डार्क स्काई’ का रविवार शाम होटल रॉयल इन में विमोचन हुआ। उनके मित्रों, प्रशंसकों, लेखकों, पूर्व सहयोगियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर पुस्तक का लोकार्पण किया।
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The autobiography of the late Santosh (Sam) Nayar, Silver Linings in the Dark Sky, was released at Hotel Royal Inn. Friends, admirers, writers, former colleagues and social activists gathered to launch the 278-page book.
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मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर ग्वालियर में ग्वालियर नगर निगम, शहर से निकलने वाले वस्त्र अपशिष्ट यानी कपड़े के कचरे को पर्यावरण के लिए समस्या मानने के बजाय एक अवसर के रूप में देख रहा है...
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For an elephant rescued after years of abuse, freedom is only the beginning. The real challenge starts after the chains are removed: healing damaged feet, rebuilding trust and learning how to live without fear. Wildlife SOS is now bringing international expertise to that difficult journey.
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रिवर कनेक्ट कैंपेन के प्रतिनिधि एवं पर्यावरणविद् डॉ देवाशीष भट्टाचार्य ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से भेंट कर आगरा में यमुना नदी से जुड़ी गंभीर समस्याओं, नदी के पुनर्जीवन तथा आगरा को ‘विरासत नगर’ घोषित कर यूनेस्को विश्व धरोहर शहर का दर्जा दिलाने के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की।
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जब वर्ष 1975 में देश में आपातकाल लागू हुआ तब व्यापारियों पर सरकारी नियमों का दबाव था और कपड़ा व्यापारियों के सामने सम्मान एवं अस्तित्व की चुनौती खड़ी थी।
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In an age marked by rising social stress, shrinking tolerance, and deepening political divides, Humour Times organised an engaging discussion on the theme, "Why Should We Laugh at Ourselves More Often?"
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Picture it. A woman walks onto a public stage. She questions the government. She takes on her opponents. She defends her party without flinching.
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लोकतंत्र में जब नया खून नहीं आता है, तो पुरानी नसों में जंग लगने लगती है। वही चेहरे, वही नारे, वही वादे और वही कुर्सी की दौड़। देश की राजनीति आज कुछ ऐसी ही थकी हुई दिखाई देती है...
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दिल्ली के कोचिंग सेंटरों के बाहर खड़े युवाओं से पूछिए, “क्या कर रहे हो?” जवाब लगभग एक जैसा मिलेगा, “यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं।” “क्यों?” “देश की सेवा करनी…
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ब्लूबेरी और जामुन अक्सर एक जैसे दिखते हैं, लेकिन असल में ये दो बिल्कुल अलग-अलग फल हैं। ब्लूबेरी उत्तरी अमेरिका की देन हैं। जो कि छोटे, गोल और हल्की खटास के साथ मीठापन लिए होते हैं। इन्हें ‘सुपरफूड’…
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