रविवार शाम को यमुना आरती स्थल पर रिवर कनेक्ट कैंपेन द्वारा आयोजित विशेष सेवा, पूजा और आरती कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के वातावरण में सम्पन्न हुआ। शीतल मंद बयार, यमुना नदी का शांत किनारा और आध्यात्मिक माहौल पूरे आयोजन को अलौकिक आभा दे रहे थे। बड़ी संख्या में जुटे भक्तों ने मां यमुना की आराधना की।

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रिवर कनेक्ट अभियान के स्वयंसेवकों ने यमुना आरती स्थल पर एकत्र होकर “एक मुट्ठी मिट्टी, एक वचन” के तहत पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली।

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घंटी बजती है। भीड़ उमड़ती है। प्रसाद मिलता है। और पीछे छूट जाता है… प्लास्टिक का पहाड़। क्या यही हमारी आस्था की पहचान है? अब तस्वीर बदलने की कोशिश शुरू हो गई है।

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यमुना किनारे रविवार की शाम गंभीर रही। हवा में चिंता थी, और स्वर में आग्रह। यमुना आरती स्थल पर रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों की एक आवश्यक सभा आयोजित की गई, जिसमें आगामी ग्रीष्म ऋतु में संभावित जल संकट, नदी की स्थिति और पर्यावरणीय चुनौतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

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In the cultural landscape of India, few regions carry the emotional and spiritual resonance of Braj. This sacred geography, spread across temples, forests, riverbanks and ancient villages, is inseparable from the life and philosophy of Krishna. For centuries, poets, devotees and performers have expressed his playful divinity through music, dance, and storytelling.

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आगरा, मथुरा और हाथरस का यह पवित्र त्रिकोण कृष्ण प्रेम की मीठी धुन पर थिरकता है। यमुना की लहरों और ब्रज की धूल में दूध, घी और खोए की महक आज भी घुली हुई है...

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