झूलन ने संघर्ष से यूं लिखी सफलता की कहानी...



बॉलीवुड के प्रति आकर्षण की कई कहानियां सबने पढ़ी और सुनी हैं, लेकिन एक फ़िल्म निर्माता के संघर्ष और सफलता की कहानियां बहुत कम लोगों तक पहुंच पाती हैं।

सही शुरुआत और फिल्मों के चयन में गलतियों के चलते अधिकतर नए निर्माता फ़िल्मों में लगे अपने निवेश को वापस नहीं निकाल पाते हैं। लेकिन, निर्माता झूलन प्रसाद गुप्ता ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानी को नए रूप में सामने रखा है।

राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार विजेता निर्देशक राजकुमार संतोषी की फ़िल्म ‘गांधी गोडसे : एक युद्ध’ के सह निर्माता के रूप में झूलन प्रसाद गुप्ता एक नए व्यक्तित्व के रूप में उभरकर आए हैं, जो अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ अपने सपनों को साकार कर रहे हैं।

गया के पंचानपुर के जेपी गुप्ता को फ़िल्मों से बहुत लगाव था, लेकिन आर्थिक मजबूरी ने कभी उन्हें इस बारे में सोचने की हिम्मत नहीं दी। एक गरीब परिवार में जन्मे जेपी गुप्ता सिविल सर्विस सेवा में जाना चाहते थे। मगर, आर्थिक तंगी के चलते वह आईआईटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए मद्रास चले गए। यहां पर भी पैसों की किल्लत ने उन्हें सिनेमा से मिलवाया।

दरअसल, होता यह था कि पढ़ाई से समय बचने के बाद झूलन प्रसाद गुप्ता फिल्मों की शूटिंग में चले जाते थे और यदा-कदा छोटे किरदार निभाकर अपने दैनिक खर्चों लायक कमा लेते थे। 

झूलन का फ़िल्मों में दिलचस्पी का सफ़र यहीं से शुरू हुआ। उन्होंने तय कर लिया कि वह फ़िल्म क्षेत्र में कुछ बड़ा करेंगे। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद झूलन ने अपना आगे का सफ़र बतौर इंजीनियर शुरू किया लेकिन एक फ़िल्म निर्माता के रूप में अपने सपने को साकार करने के लिए सही समय का इंतज़ार करते रहे।

निर्देशक राजकुमार संतोषी ने उनके अपने महत्वाकांक्षी फ़िल्म ‘बेटल ऑफ सारागढी’ प्रोजेक्ट के बारे में बताया तो जेपी गुप्ता ने इस फ़िल्म से अपने फ़िल्म निर्माता के करियर की शुरुआत की। कुछ वजहों से इस फ़िल्म के बन नहीं पाने से वह निराश नहीं हुए और एक बार फिर निर्देशक राजकुमार संतोषी पर अपना भरोसा रखते हुए फ़िल्म ‘गांधी गोडसे : एक युद्ध’ के लिए बतौर सह-निर्माता तैयार हो गए। अपनी कंपनी जेपीजी प्रोडक्शन के बैनर तले इस फिल्म का निर्माण शुरू किया।

कांग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा फ़िल्म में महात्मा गांधी के जीवन को ठीक से नहीं  दिखाने और हत्यारे नाथूराम गोडसे को महिमामंडित किए जाने के आरोप पर जेपी गुप्ता बताते हैं कि आज गांधी और गोडसे की चर्चा सिर्फ़ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हैं। इस फिल्म की प्रस्तुति और विषयवस्तु को फ़िल्म समीक्षकों और प्रभावशाली लोगों ने पसंद किया है।




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