मजदूर पिता के सपने और हकीकत के बीच द्वंद्व है 'बाबुल'

वर्ल्डवाइड के बैनर तले निर्मित रत्नाकार कुमार और अवधेश मिश्रा की भोजपुरी फ़िल्म ' बाबुल' एक मजदूर और लाचार पिता के सपनों और हकीकत के बीच द्वंद्व की कहानी है।

फिल्म में अवधेश मिश्रा का किरदार ईंट भट्ठे पर काम करने वाले मजदूर का है, जिसकी दो बेटियां हैं और वह उसके लिए बड़े-बड़े सपने संजोता है। लेकिन, हकीकत कुछ और ही है, जहां उन्हें सामाजिक उलझनों और जमींदारी का स्याह सच उनके सपनों को झकझोर देता है।

फिल्म को लेकर अवधेश मिश्रा कहते हैं कि यह फिल्म मानवीय संवेदनाओं को उभारने वाली है और दर्शकों के लिए एक संदेश छोड़ेगी।

बता दें कि फ़िल्म बाबुल के निर्माता रत्नाकर कुमार हैं। निर्देशन अवधेश मिश्रा ने खुद किया है। प्रस्तुतकर्ता वर्ल्डवाइड के साथ जितेंद्र गुलाटी हैं। संगीत साबिर सुल्तान खान, हितेश सोनिक और साजन मिश्रा का है। गीत आशुतोष तिवारी, बोद्धव्य व  एएम तुराज़ ने लिखे है और इन्हें अमीर खान, शवाब साबिर, नाज़िम अली सिद्दीकी, रेखा भारद्वाज, स्निग्धा सरकार व ऐश्वर्या मजूमदार ने गाया है। डीओपी जग्गी पाजी, कोरियोग्राफर कानू मुखर्जी व पीआरओ रंजन सिन्हा हैं।

फ़िल्म में अवधेश मिश्रा, नीलम गिरी, शशि रंजन, अनिता रावत, देव सिंह, संतोष पहलवान, रोहित सिंह मटरू, हीरा यादव, अम्बिका वाणी, बबलू खान, कमलकांत मिश्रा, कमलेश मिश्रा और प्रीति सिंह मुख्य भूमिका में हैं।


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