यमुना किनारा रोड स्थित यमुना आरती स्थल पर सात दिवसीय ब्रज सांस्कृतिक उत्सव का विधिवत उद्घाटन किया गया। उद्घाटन समारोह में आस्था, संस्कृति और पर्यावरण चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला।
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यमुना किनारा रोड स्थित यमुना आरती स्थल पर सात दिवसीय ब्रज सांस्कृतिक उत्सव का विधिवत उद्घाटन किया गया। उद्घाटन समारोह में आस्था, संस्कृति और पर्यावरण चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला।
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रिवर कनेक्ट कैंपेन के अनुसार शहर की जीवन रेखा यमुना नदी आज गंभीर संकट से जूझ रही है। कैंपेन प्रमुख बृज खंडेलवाल ने बताया कि दिल्ली से आने वाले अनुपचारित नालों का गंदा पानी आगरा तक पहुंच रहा है।
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उत्तर प्रदेश में अमरोहा जिले के गजरौला निवासी राम सिंह बौद्ध ने अपने निजी शौक को राष्ट्रीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण योगदान में बदल दिया है। उन्हें ‘भारत का रेडियो मैन’ कहा जाता है...
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Ram Singh Bouddh, often described as the ‘Radio Man of India’, from Gajraula of Amroha District in Uttar Pradesh, has transformed a personal passion into a national cultural contribution.
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आगरा शहर इन दिनों एक अनोखा उदाहरण पेश कर रहा है, जहां गर्भ संस्कार को जीवंत रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। क्या मां के गर्भ को संस्कारित करने का मतलब सिर्फ आस्था है, या विज्ञान भी इसे समर्थन देता है? हाल में आयोजित कार्यक्रमों में दावा किया गया है कि गर्भ में ही बच्चे को अच्छे संस्कार दिए जा सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे महाभारत में अभिमन्यु ने अपनी मां सुभद्रा के गर्भ में चक्रव्यूह भेदने की विद्या सीखी थी। समाजसेवी अशोक गोयल की पहल पर चल रहे ये प्रयास लोगों में जागरूकता फैला रहे हैं...
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आम आदमी का दर्द और उससे जुड़े अदब की रूह आज भी उन आवाज़ों में ज़िंदा है जो सीधे दिल से बात करती हैं। नज़ीर अकबराबादी और सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ ऐसे ही शायर-कवि हैं, जो सदियों बाद भी लोगों के ज़हन और दिल में सांस लेते हैं। वे भारत की साझा साहित्यिक विरासत की रौनक और जान हैं...
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On January 11, hundreds of people, environmental activists, and prominent saints gathered in Sirsi. Together, they demanded that rivers too should be given the "right to live"—just as humans have rights under the Constitution. They urged that laws be enacted to ensure the natural, uninterrupted flow of rivers.
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Picture it. A woman walks onto a public stage. She questions the government. She takes on her opponents. She defends her party without flinching.
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लोकतंत्र में जब नया खून नहीं आता है, तो पुरानी नसों में जंग लगने लगती है। वही चेहरे, वही नारे, वही वादे और वही कुर्सी की दौड़। देश की राजनीति आज कुछ ऐसी ही थकी हुई दिखाई देती है...
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दिल्ली के कोचिंग सेंटरों के बाहर खड़े युवाओं से पूछिए, “क्या कर रहे हो?” जवाब लगभग एक जैसा मिलेगा, “यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं।” “क्यों?” “देश की सेवा करनी…
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ब्लूबेरी और जामुन अक्सर एक जैसे दिखते हैं, लेकिन असल में ये दो बिल्कुल अलग-अलग फल हैं। ब्लूबेरी उत्तरी अमेरिका की देन हैं। जो कि छोटे, गोल और हल्की खटास के साथ मीठापन लिए होते हैं। इन्हें ‘सुपरफूड’…
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