उत्तर प्रदेश में अमरोहा जिले के गजरौला निवासी राम सिंह बौद्ध ने अपने निजी शौक को राष्ट्रीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण योगदान में बदल दिया है। उन्हें ‘भारत का रेडियो मैन’ कहा जाता है...
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उत्तर प्रदेश में अमरोहा जिले के गजरौला निवासी राम सिंह बौद्ध ने अपने निजी शौक को राष्ट्रीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण योगदान में बदल दिया है। उन्हें ‘भारत का रेडियो मैन’ कहा जाता है...
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Ram Singh Bouddh, often described as the ‘Radio Man of India’, from Gajraula of Amroha District in Uttar Pradesh, has transformed a personal passion into a national cultural contribution.
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आगरा शहर इन दिनों एक अनोखा उदाहरण पेश कर रहा है, जहां गर्भ संस्कार को जीवंत रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। क्या मां के गर्भ को संस्कारित करने का मतलब सिर्फ आस्था है, या विज्ञान भी इसे समर्थन देता है? हाल में आयोजित कार्यक्रमों में दावा किया गया है कि गर्भ में ही बच्चे को अच्छे संस्कार दिए जा सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे महाभारत में अभिमन्यु ने अपनी मां सुभद्रा के गर्भ में चक्रव्यूह भेदने की विद्या सीखी थी। समाजसेवी अशोक गोयल की पहल पर चल रहे ये प्रयास लोगों में जागरूकता फैला रहे हैं...
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आम आदमी का दर्द और उससे जुड़े अदब की रूह आज भी उन आवाज़ों में ज़िंदा है जो सीधे दिल से बात करती हैं। नज़ीर अकबराबादी और सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ ऐसे ही शायर-कवि हैं, जो सदियों बाद भी लोगों के ज़हन और दिल में सांस लेते हैं। वे भारत की साझा साहित्यिक विरासत की रौनक और जान हैं...
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On January 11, hundreds of people, environmental activists, and prominent saints gathered in Sirsi. Together, they demanded that rivers too should be given the "right to live"—just as humans have rights under the Constitution. They urged that laws be enacted to ensure the natural, uninterrupted flow of rivers.
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When did we stop fixing things? When did a loose wire become a death sentence? When did a cracked screen mean goodbye, not repair?
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Every year, the same dream grows in millions of Indian homes: a son or daughter becomes a doctor. Every year, that dream must pass through a difficult exam. And every year, the mountain of hopes collides…
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एक तरफ़ देश में एक्सप्रेसवे, मेट्रो, एयरपोर्ट और डिजिटल क्रांति की नई इबारत लिखी जा रही है। दूसरी तरफ़ समाज का एक बड़ा हिस्सा अब भी सदियों पुराने पूर्वाग्रहों और सामंती सोच की जंजीरों में जकड़ा हुआ…
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आगरा, मथुरा और हाथरस का यह पवित्र त्रिकोण कृष्ण प्रेम की मीठी धुन पर थिरकता है। यमुना की लहरों और ब्रज की धूल में दूध, घी और खोए की महक आज भी घुली हुई है...
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