आम आदमी का दर्द और उससे जुड़े अदब की रूह आज भी उन आवाज़ों में ज़िंदा है जो सीधे दिल से बात करती हैं। नज़ीर अकबराबादी और सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ ऐसे ही शायर-कवि हैं, जो सदियों बाद भी लोगों के ज़हन और दिल में सांस लेते हैं। वे भारत की साझा साहित्यिक विरासत की रौनक और जान हैं...
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