सूर सरोवर पक्षी विहार को संरक्षित रखने की मांग



आगरा : सूर सरोवर पक्षी विहार को ईको-सेंसिटिव एरिया के रूप में संरक्षित रखने की मांग अब जोर पकड़ रही है।

ध्यान रहे, पिछले दिनों मीडिया में प्रदेश सरकार द्वारा सूर सरोवर पक्षी विहार के ईको सेंसिटिव क्षेत्र का दायरा घटाकर शून्य करने की योजना के बारे में खबरें थीं।

स्थानीय विशेषज्ञों के अनुसार, पक्षी विहार के ईको सेंसिटिव जोन को शून्य किलोमीटर घोषित करना इस अति संवेदनशील जंगल के लिए प्राणघातक है। यह जंगल मथुरा रिफाइनरी से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण को आगरा शहर में पहुंचने से रोकता है। राजस्थान से उठने वाले धूल के कणों को भी यह वन सोखता है। यहां 165 प्रकार के पशु-पक्षी पाए जाते हैं। अजगरों की बहुतायत के चलते यह जंगल तक्षक वन के रूप में भी प्रसिद्ध है।

रिवर कनेक्ट कैंपेन ने इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखा है। अभियान के संयोजक बृज खंडेलवाल ने बताया कि सूर सरोवर पक्षी विहार एक संरक्षित वन है, जो तमाम देशी और विदेशी पक्षियों का आशियाना है। साथ ही, यह रेमसर वेट लैंड साइट के रूप में भी मान्यता प्राप्त है। यह आगरा के ताज महल और मथुरा रिफाइनरी के बीच एक सुरक्षित ग्रीन फिल्टर या बफर के रूप में कार्य करता है।

सरकार की प्रस्तावित योजना के विरोध में बीते दिन एक प्रदर्शन भी किया गया। प्रदर्शन में डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य, सुशील गोस्वामी, चतुर्भुज तिवारी, मुकुल पांड्या, अतुल अग्निहोत्री, भगवान सिंह महंत, शाहतोष गौतम, निधि पाठक, प्रियंका गौतम, दिलीप जैन, दीपक राजपूत, राकेश गुप्ता, आरुष राजपूत, मनोज कुमार, मंजू, राजीव गुप्ता व डॉ. मुनीश्वर गुप्ता आदि ने भाग लिया।