आगरा : दिवाली का त्योहार आने वाला है। बाजारों में रौनक है, शहर में उत्सव की तैयारी है। लेकिन, यमुना की बदहाली पर सरकारी तंत्र की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है। आखिर जनप्रतिनिधियों को जगाने का इससे बेहतर तरीका क्या हो सकता है? झुनझुना बजाकर उन्हें उनकी जिम्मेदारियां याद दिलाई जाएं!
इसी मकसद से रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने यमुना आरती स्थल पर अनोखे अंदाज में 'झुनझुना दिवस' मनाया। सदस्यों ने झुनझुने बजाकर यमुना के प्रति सरकारी बेरुखी और राजनीतिक उदासीनता का प्रतीकात्मक विरोध किया। इस दौरान नारे गूंजे, "आगरा को क्या मिला? झुनझुना, झुनझुना!"
रिवर कनेक्ट कैंपेन के संयोजक बृज खंडेलवाल ने कहा कि वर्षों से संगठन यमुना के पुनर्जीवन की मांग उठा रहा है। सूखी और प्रदूषित यमुना में सालभर ताजे पानी का अविरल प्रवाह सुनिश्चित किया जाए। ताज महल के डाउनस्ट्रीम में बैराज बनाया जाए। नदी की तलहटी की गाद और गंदगी हटाकर सफाई कराई जाए। यमुना नदी बेसिन की सहायक नदियों का संरक्षण हो और रिवरफ्रंट का विकास साबरमती नदी मॉडल पर किया जाए। उन्होंने कहा कि अनेक घोषणाओं और वायदों के बावजूद यमुना की हालत में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। सरकारी विभागों और राजनीतिक नेतृत्व की यह बेरुखी आगरा के नागरिकों के लिए बेहद पीड़ादायक है।
कार्यक्रम में डॉ देवाशीष भट्टाचार्य ने उम्मीद जताई कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की भाजपा सरकार यमुना पर बैराज निर्माण का काम शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि समूचे ब्रज मंडल की जीवनरेखा है। इसके संरक्षण के लिए अब ठोस और समयबद्ध कदम उठाने की जरूरत है।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि झुनझुना दिवस किसी उत्सव का हिस्सा नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों को उनके चुनावी वायदों और सार्वजनिक जिम्मेदारियों की याद दिलाने का शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रयास है। संदेश साफ है कि आगरा को आश्वासन नहीं, यमुना को पानी चाहिए।
आज के कार्यक्रम में हरेंद्र गुप्ता, अभिनव, मीरा खंडेलवाल, डॉ ज्योति खंडेलवाल, विशाल झा, राकेश गुप्ता, चतुर्भुज तिवारी, डॉ मुकुल पंड्या, पद्मिनी अय्यर, शशिकांत उपाध्याय, रंजन शर्मा, मुकेश चौधरी व दिनेश शर्मा आदि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में विशेष यमुना आरती कराई गई। उपस्थित सदस्यों ने यमुना के पुनर्जीवन और ब्रज की प्राकृतिक विरासत के संरक्षण का संकल्प दोहराया।

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